कुंडली (जन्म कुंडली या जन्म पत्री) आपके जन्म के समय और स्थान पर आकाश का नक्शा है। यहाँ बताया गया है कि हमारी कुंडली में क्या मिलता है, इसकी गणना कैसे होती है और सबसे पहले क्या देखें।
आपकी कुंडली में क्या है
स्क्रीन पर मुख्य कुंडली और ज़रूरी जानकारी मिलती है। डाउनलोड होने वाली PDF में इससे कहीं ज़्यादा है:
- जन्म विवरण और अवकहड़ा चक्र: चंद्र राशि, नक्षत्र और चरण, वर्ण, योनि, गण, नाड़ी आदि।
- लग्न (D1) कुंडली, हर ग्रह के अंश, राशि, नक्षत्र और भाव के साथ।
- सभी सोलह वर्ग कुंडलियाँ और भाव चलित कुंडली।
- प्रत्यंतर दशा तक विंशोत्तरी दशा, और योगिनी दशा।
- अष्टकवर्ग, साढ़े साती की समय-रेखा, मांगलिक और कालसर्प की जाँच, योग और लिखित फल।
हम गणना कैसे करते हैं
ग्रहों की स्थिति स्विस एफ़ेमेरिस से ली जाती है, जो ज़्यादातर गंभीर ज्योतिष सॉफ़्टवेयर में इस्तेमाल होने वाली खगोलीय लाइब्रेरी है। आपका जन्म समय, चुने गए जन्म स्थान के टाइम ज़ोन के हिसाब से बदला जाता है।
हम निरयन (साइडरियल) राशिचक्र और लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश का उपयोग करते हैं, जिसे भारत सरकार की पंचांग समिति ने मानक माना है। भाव पूर्ण-राशि (whole-sign) पद्धति से हैं: जन्म के समय उदित राशि पहला भाव, अगली राशि दूसरा भाव, और इसी तरह आगे।
निरयन राशिचक्र के कारण यहाँ आपकी सूर्य राशि अक्सर पश्चिमी अख़बारी राशिफल से एक राशि पीछे होती है। यह गलती नहीं, स्वाभाविक है।
वर्ग कुंडलियाँ
हर वर्ग कुंडली प्रत्येक राशि को छोटे हिस्सों में बाँटकर कुंडली दोबारा बनाती है, ताकि जीवन के किसी एक क्षेत्र को बारीकी से देखा जा सके। नवांश (D9) सबसे प्रसिद्ध है: इसे विवाह और ग्रहों के असली बल के लिए देखा जाता है।
हम पाराशरी षोडशवर्ग की सभी सोलह कुंडलियाँ बनाते हैं: D1, D2, D3, D4, D7, D9, D10, D12, D16, D20, D24, D27, D30, D40, D45 और D60। वर्ग जितना ऊँचा, वह सही जन्म समय पर उतना ज़्यादा निर्भर है।
भाव चलित
मुख्य कुंडली में ग्रह का भाव केवल राशि से तय होता है। भाव चलित कुंडली में भाव सटीक लग्न अंश से श्रीपति पद्धति द्वारा मापे जाते हैं, इसलिए राशि के किनारे पर बैठा ग्रह अगले या पिछले भाव में जा सकता है।
जब कोई ग्रह चलित में भाव बदलता है, तो ज्योतिषी अक्सर उसका फल चलित भाव से देखते हैं। अगर लग्न कुंडली और चलित एक जैसी हैं, तो मुख्य कुंडली को ज़्यादा भरोसे से पढ़ा जा सकता है।
विंशोत्तरी दशा: घटनाओं का समय
विंशोत्तरी 120 वर्ष का ग्रह-दशाओं का चक्र है। यह कहाँ से शुरू होगा, यह जन्म के समय चंद्रमा के नक्षत्र और उस नक्षत्र में चंद्रमा कितना आगे बढ़ चुका था, इस पर निर्भर करता है।
हर महादशा अंतर्दशाओं में बँटती है, और अंतर्दशा प्रत्यंतर दशाओं में। जिस ग्रह की दशा चल रही है और कुंडली में उसकी स्थिति, उस समय का स्वभाव तय करती है। दूसरे दृष्टिकोण के लिए 36 वर्ष की योगिनी दशा भी दी गई है।
जन्म समय कितना सही होना चाहिए?
लग्न राशि लगभग हर दो घंटे में बदलती है, और लग्न का अंश लगभग हर चार मिनट में एक अंश आगे बढ़ता है। इसलिए एक ही तारीख पर अलग समय से लग्न, भाव और दशा की तारीखें बदल सकती हैं।
- ग्रहों की राशि और चंद्र नक्षत्र: समय कुछ घंटे इधर-उधर हो तब भी अक्सर ठीक रहते हैं (हालाँकि चंद्रमा दिन में नक्षत्र बदल सकता है)।
- लग्न और भाव: समय लगभग 15–30 मिनट के भीतर सही होना चाहिए; राशि बदलने के पास जन्म हो तो और सटीक।
- नवांश और ऊँची वर्ग कुंडलियाँ: समय कुछ ही मिनट के भीतर सही होना चाहिए। D60 पर भरोसा तभी करें जब समय लिखा हुआ हो।
- अगर समय बिल्कुल नहीं पता, तो "मुझे सही समय नहीं पता" चुनें। तब हम दोपहर 12:00 मानते हैं और बताते हैं कि किन हिस्सों पर कम भरोसा करें।
सबसे पहले क्या देखें
- आपका लग्न और लग्नेश: वह कहाँ बैठा है और कितना बलवान है।
- आपकी चंद्र राशि और नक्षत्र: दैनिक राशिफल और दशा की गणना इन्हीं पर आधारित है।
- अभी कौन-सी महादशा और अंतर्दशा चल रही है, और अगली कब शुरू होगी।
- दोष टैब: मांगलिक, कालसर्प और साढ़े साती चल रही है या नहीं।
- विवाह या साझेदारी के प्रश्न हों तो आपकी नवांश (D9) कुंडली।